मैं खुद ही निपट लूँगा…..😀😀😀😀😊👍

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रातें के शहर में कब्जा अंधेरा का होता हैं,

अंधेरे में अंधेरे का नाम भी…. ले लेना चमत्कार सा होता हैं,

वैसे ही मेरा रंग हैं,

ये रंग भी बड़ा बैरंग हैं

कही पर ये मुझे यह नहीं दिखता,

कही पर इसे में नहीं दिखता,

छुप्पन छुपाई खेलते हैं दोनों,

कभी आँखे बंद कर के,

कभी आँखे खोल के,

पर समस्या वही….😁😁😁😁😁

ये मुझे नहीं,

और मैं इसे नहीं दिखता,

अचानक से कभी रोशनी हम से मिलने आ जाऐ,

तब भी वो ही बात खड़ी हो जाती हैं,

कैसे……….???????

कैसे होगा मिलन,

कैसे रहेगा मन प्रसन्न,

इस का जवाब खुद दिया मन ने,

कहा मेरे घोंचूँ,

जब तू चूप होगा,

तब ही ही तो मुझे सोचने मौका मिलेगा,

ठहर जा, ठहर जा…..!!!!!

और मुझे सोचने दें,

मेरी नौ ठईया बालक की माँ का होगो,

तू सच में बहुत बड़ा चिरांद हैं,

हर समय बकर बकर…..

ये बता रंग काला किसका,

मैनें कहा मेरा और अंधेरा का,

ससुर ये बता….!!!!!

ये अंधेरा कौन,

और ये तेरा कौन,

मैनें कहा,

अरे ये वो ही हैं,

जो रातों में तंग करता हैं,

दिन में सूरज से जंग करता हैं,

ससुर ये अब ये सूरज कौन आ गया,

सच मैं राजीव तुम बहुत बड़े चिरांद हो,

मैनें कहा अरे भाई तू जा यार,

मैं सब खुद देख लूँगा….

अरे जा यार जा यार मैं खुद ही निपट लूँगा….😁😁😁😁😁😊😇😇😇😇😀😊👍

EK SALUTE TOO BANTA HAI DOST…..😊😇😇😇😇😊👌👌👌👌👌👍

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इस जिन्दगी को कैसे देखूँ,

इस सीने से दिल को निकाल के कैसे फैंकूँ,

साला रोज तंग करता हैं,

साला रोज….. साला मुझ से ही जंग करता हैं,

अरे ये मेरा ही हैं ना,

कही सौतेला तो नहीं….!!!!

पर सोचने की यही तो बात हैं इसकी सौत हैं कौन…..!!!!!

कौन हैं कौन….. हैं वो…..!!!!

इसी सोच में ना जाने कितनो की जिन्दगी निकल जाती हैं,

और हमारी तो पिघल जाती हैं…..जिन्दगी….😀😀😀😀,

लिखने वाले सच में बहुत मेहनत करते हैं,

पहले अपने लिए लिखो,

फिर सामने वाले के लिए लिखो,

फिर दाँयें वाले के लिए लिखो,
फिर बाँये वाले के लिए लिखो,

फिर आगे वाले के लिए लिखो,

फिर पीछे वाले के लिए लिखो,

फिर ऊपर वाले के लिए लिखो,

फिर नीचे वाले के लिए लिखो,

और अगर अब भी दम बच जाऐ तो,

दोस्त, दुश्मन, अजनबी, पड़ोसी, रिश्तेदार, आलतू,फालतू दुनिया के बारे भी लिखो….😀😀😀😀😀,

सच में अब तो इस सर्दी में पसीने भी आने लग गऐ,

SAARE WRITTERS K LIYE,

EK SALUTE TOO BANTA HAI DOST…😊😇😇😇😇😊👌👌👌👌👌👍

ऐसे ही देखे कर मोऐ रोज….😀😀😀😀😀😊👍

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हेल्लो…….!!!!!!

पहचाना……!!!!!!

अरे छेड़ न रा तोऐ छोरी,

मैं तो तोऐ से पूछ रो हूँ,

तू का मोऐ जाने हैं,

अरे तोऐ का बताऊँ….!!!!!

मैं गुम गो,

तेरे प्यार के शहर मो,

और तोऐ सल न हैं,

तू कैसी छोरी हैं,

एक छोरा तेरे लिए ऐसे घुम रो हैं,

जैसे फर्रटेदार पंखा घुमे है न तेरे छत पे,

बाये जैसे मैं भी घूम रो हूँ तेरे ख्यालों में,

तोऐ जरा सी भी लाज न हैं,

कैसे अपने प्रेमी से बात करें,

तोऐ तो नच वा लो…… गव्वा  लो,

हवा खिलवा लो, मेरे जैसे छोरे के दिल के साथ,

रे बाबरी साँची में तोऐ कोई लाज शर्म न हैं,

घुर्र रई हैं मोऐ,

एक तो तोऐ समझा रा हूँ, बतला रा हूँ,

तेरी आँखों में नाेन मिर्चा,

मोऐ नजर लगाऐं….!!!!!

आँखे फुट्ट री,

नजर न आरों,

मोऐ पहले से नजर का चश्मा लगो हैं,

टुकुर टुकुर देख रई हैं मोऐ,

चल देख लें,

मोऐ भी अच्छा लग रो हैं,

एेसे ही देखेे कर मोऐ रोज ……

ऐसे ही देखे कर मोऐ रोज…..😀😀😀😀😀😊👍

Hai Na….😊

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Thanks a lot to my all Innocent….Friends….😀😀😀😀😊👍

Because they are who braves,

Who read my content when I wrote,

I can understand how they are TOLERATE ME….😀😀😀😀😀😊

Par dosto koi too pareshaan karna bhi chahiye hai na….😀😀😀😀😀😊👍