It’s Called

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1 Year Anniversary

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Thank you very much for give me huge response to according my personality!! 

Ha ha ha ha 😂😂😂😂😍😍😍😇😇☺👍

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मुझ से उम्मीद लगाते हैं वो,

जिन्हें खुद पर यकीन नहीं,

जिन्हें खुद पर यकीन नहीं,

तो उन्हें कैसे पता मैं भी,

इसी दुनिया में हूँ!!
पहले खुद को तराशों,

फिर खुदा को,

खुदा तुम्हें खुद मिलेगा,

पर उस के नक्शे कदम पर,

एक बार चल कर तो देखो!!
देखते हैं वह जिसे मन दिखाना चाहता हैं,

कभी मन से परे देखा,

कभी सोचा तुमने सच क्या हैं,

वह, जो दिख रहा हैं,

या वह, जो दिखाया जा रहा हैं!!
बेशक ये दुनिया कुदरत ने बनाई हैं,

पर जिंदा तो हमने रखनी हैं,

अपने अच्छे कर्मों से,

नतीजे भी यही मिलने हैं अपनी परीक्षा के,

तो बस दोस्तों अच्छे कर्म करो,

और माता-पिता व

अपने गुरू का नाम रोशन करो!!
मैं आपका अपना,

सिर्फ राजीव हूँ,

गऱ याद रहे,

पर भूल जाना मुझे,

मैं किसी के यादों में रहने के काबिल नहीं!!
अपना और अपनों का ध्यान रखना,

जय भोले की☺

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ताज़ूब न कर मेरे यहाँ होने पर, 

पुराने चहेरों पर नएे चहरे चढ़ जाऐंगे, 

मेरे यहाँ होने पर!! 
सबकी शकश्यित अलग अलग होती हैं, 

ये बात हमारा दिल मानता हैं पर दिमाग नहीं, 

वो बात अलग हैं मेरी कुछ ज्यादा ही अलग हैं😂😂
असानी से ये बात गऱ सबको समझ आ जाऐ, 

तो यहाँ लोगों को राजीव की मेहनत भी समझ आ जाऐ😂😂
गुड मॉर्निंग फ्ररेन्डस, 

मेरे सारे दोस्त को, 

सुबह-सुबह वाली, 

मेरी प्यारी सी, 

जय भोले की 🙂

राजीव तू तो रहा राही अपनी राह अपनी मंजिल का……!!!! 

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अकेलेपन का एहसास होने लगा, 

फितरत को गुमान होने लगा, 

कहती हैं तू अकेला ही सही हैं, 

टुटा शीशा कब से पहले जैसे होने लगा……!! 

इसी बात पर आँखें मेरी, 

हर बात पर तेरी, 

गीली गीली सीली सीली से होने लगी, 

फिक्र न कर बारिश भी मेरी कीचड़ भी मेरी….!!!! 

तू तो रहा शहजादा अपनी अाजादी का, 

तू तो रहा परिंदा आजाद गगन का, 

गुलामी से प्यार तुझे कब से हो गया, 

तू तो रहा राही अपनी राह अपनी मंजिल का, 

राजीव तू तो रहा राही अपनी राह अपनी मंजिल का……!!!!! 

कौन हो तुम मेरे

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कैसे न छोड़ू तेरा दामन, 

जब तू ही बना दुशासन, 

मेरी अस्ती पंजर का, 

मेरी हस्ती मंजर का, 

मुझे मारने के लिए, 

जरूरत नहीं किसी हथियार की, 

मेरे लिए तो मेरी शर्म ही काफी हैं, 

मुझे जाऱ जाऱ करने के लिए, 

बेहद जरुरी हैं, 

तुम्हें जानना, 

वजह मेरी बेरूखी की, 

पर ये बता क्या कमी, 

रह गई थी मेरे प्यार में, 

क्यूँ जरूरत पड़ी, 

तुम्हें मुझे अजमाने की, 

कभी दिल पर भी, 

हाथ रख लेना धधकते हुऐ हैं कलजे पर मेरे, 

तुम्हें खुद ही महसूस हो जाऐगा, 

कौन हो तुम मेरे, 

कौन हो तुम मेरे!! 

मानी बस मेरी ☺

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जिंदगी कारोबार सी बढ़ती रही, 

मुस्कान उसकी कर्जदार सी चढ़ती रही, 

मैं उसके मोहब्बत के लगान तले दबता चला गया, 

और आज आलम यह हुआ हैं कि, 

मेरा रोम रोम उसकी इबादत में डुब गया, 

मेरे जिया ज्यादा इसलिए क्यूँकि, 

मैं उससे प्यार करने लग गया, 

जिसने सुनी तो सबकी, 

पर मानी बस मेरी ☺